रेत में ठिकाने और फ्लाई ओवर की छाँव

1.       छत की ख्वाहिश लाज़मी है मगर बारिश के बगैर बसर कहाँ ,

ऊँची इमारत पसंद है मगर फूटपाथ के बगैर शहर कहाँ

मस्जिदों का नाम बहुत है मगर गरीब की दुवाओं के बगैर असर कहाँ ,

कातिल को रातों रोते […]

Bade Hokar

Badey hokar
Kya banunga bade hokar ,
Sochta tha bachpan mein.
Kabhi police ki wardi mein,
Toh kabhi badey pardon par,
Dekhta tha khud ko
na jaane kitne rangon mein..Ab jo kaam main karta hun,
Kehata hun sab se badhiya hai,
Sach poocho toh yeh kewal,
2 paison […]

Shehar Ko Zinda Rahne Do…

 

सड़क की चीखें..जब कानों को काटती नहीं..

तो एक अजीब सा कोलाहल

रेंगता है मन में…

तनाव ढीलता है

तो कमज़ोरी कसने लगती है

ऑक्सिजन की ओवर सप्लाइ

फेफड़ों को डसने लगती है…

ऐसा लगता है…

जैसे शहर मरने लगा है मुझ […]

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