POEM/ KAVITA

Sapno Ka Ek Parinda

2020-07-16T14:19:35+05:30

सपनों का एक परिंदा हर पल चला उड़ता, नई नई गलियों में मंज़िलें नई ढूंढता. ऊँची ऊँची इमारतों में... न मिला आशियाँ, भूला इस क़दर कि खो दिया आसमाँ सपनों का एक परिंदा हर पल [...]

Sapno Ka Ek Parinda2020-07-16T14:19:35+05:30

रेत में ठिकाने और फ्लाई ओवर की छाँव

2020-04-12T14:21:25+05:30

1.       छत की ख्वाहिश लाज़मी है मगर बारिश के बगैर बसर कहाँ ,           ऊँची इमारत पसंद है मगर फूटपाथ के बगैर शहर कहाँ         [...]

रेत में ठिकाने और फ्लाई ओवर की छाँव2020-04-12T14:21:25+05:30
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