Shehar Ko Zinda Rahne Do…

सड़क की चीखें..जब कानों को काटती नहीं..

तो एक अजीब सा कोलाहल

रेंगता है मन में…

तनाव ढीलता है

तो कमज़ोरी कसने लगती है

ऑक्सिजन की ओवर सप्लाइ

फेफड़ों को डसने लगती है…

ऐसा लगता है…

जैसे शहर मरने लगा है मुझ में..

पहाड़ों से उलझे तारों को देख […]