Woh Jild Wali Ladki

उसे न तो जानता था, न पहचानता था. सिर्फ़ नाम जानता था, उसकी लिखाई ( हैंडराइटिंग) पहचानता था, पर ख़यालो में उसे अक्सर ढूँढा करता था … बड़ी चाह थी एक बार तो मिलूं उससे … मगर हर […]

Ishq Mein Robot

दिवाली की छुट्टियों का मौसम था… मेरा शहर सुबह-सुबह जाग जाता, और फिर.. दिन भर अलसाया सा रहता… मैं भी अपनी बालकोनी पे कोई किताब खोले… बैठा कम, सोता ज़्यादा रहता … करता भी तो क्या..तब छानने के लिए […]

Bade Hokar

Badey hokar
Kya banunga bade hokar ,
Sochta tha bachpan mein.
Kabhi police ki wardi mein,
Toh kabhi badey pardon par,
Dekhta tha khud ko
na jaane kitne rangon mein..Ab jo kaam main karta hun,
Kehata hun sab se badhiya hai,
Sach poocho toh yeh kewal,
2 paison […]
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