Woh Jild Wali Ladki

उसे न तो जानता था, न पहचानता था. सिर्फ़ नाम जानता था, उसकी लिखाई ( हैंडराइटिंग) पहचानता था, पर ख़यालो में उसे अक्सर ढूँढा करता था … बड़ी चाह थी एक बार तो मिलूं उससे … मगर हर […]

Ishq Mein Robot

दिवाली की छुट्टियों का मौसम था… मेरा शहर सुबह-सुबह जाग जाता, और फिर.. दिन भर अलसाया सा रहता… मैं भी अपनी बालकोनी पे कोई किताब खोले… बैठा कम, सोता ज़्यादा रहता … करता भी तो क्या..तब छानने के लिए […]

रेत में ठिकाने और फ्लाई ओवर की छाँव

1.       छत की ख्वाहिश लाज़मी है मगर बारिश के बगैर बसर कहाँ ,

ऊँची इमारत पसंद है मगर फूटपाथ के बगैर शहर कहाँ

मस्जिदों का नाम बहुत है मगर गरीब की दुवाओं के बगैर असर कहाँ ,

कातिल को रातों रोते […]

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